दुखवा का से कहूँ......

इंडियानामा... अपनी इस परिस्थिती से कैसे रुबरु होउ कुछ समझ में नहीं आ रहा है। हर बार अपने जीवन का होना बडा ही निरर्थक लगता है। पिछले दिनों से यही धारणा मुझे अपने घेरे में ले लिया है। इस अवसाद से निकलने का कोई रास्ता नहीं निकल रहा है। लग रहा है कि सब कुछ छूट गया बेह... [पूरी पोस्ट]
writer Rajiv Ranjan Singh
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[15 Jul 2008 03:12 AM]

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