अरब, शंख, पद्म शुभकामनाएँ

हरी मिर्च एक जाता हुआ साल - ३ बहुरि थके देसी शेर - अरब, शंख , पद्म शुभकामनाएँ - एक गपोड़्शंख वहां सो चुकी है रात, या मौसम सिंदूरी है तुम्हारे और मेरे बीच, बस बातों की दूरी है आधे से अधूरे छू गए, थोडी सी बक-बक में जो रह गए वो मनचले फेहरिस्त पूरी है इस साल की मीय... [पूरी पोस्ट]
writer जोशिम
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[03 Jan 2008 05:11 AM]

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