एक कविता लिखने की कविता
चल-चल, निशा की सोच में, मानव जगाले, चल आ चल, कलम की नोक से, कागज़ जलाले, चल दीखे दाख हैं दिन भर खड़े गल्पों के रेती घर तमन्ना की रसीदें तम नयन भर मील के पत्थर पलक भर भूल दुःख जीवन अरे लिख रागिनी अनमन कोई बस पढ़ जुड़ा लेगा तेरे इस मन से अपनापन द्वार दर ख...
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जोशिम
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[14 Jan 2008 14:57 PM]



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