रोटी बनाम डबल रोटी ?
थोड़ी मोहब्बत सभी पर उतरने दें थोड़े करम चाहतों पर भी करने दें सितारों की महफ़िल रहे आसमानी ख़ुदा बंद जड़ को, ज़मीं से गुज़रने दें बूंदों के रिसने को रोकें नहीं बस सागर रहें, अंजुरी भर दो भरने दे जब छूट पाएं वो फ़ाज़िल सवालों से बैठक से बाहर, नज़र चार धरने...
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जोशिम
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[09 Dec 2008 00:08 AM]



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