किताब हिसाब
याने अफसाना नंबर दो ; उर्फ़ जहाज का पंछी; उर्फ़ घुमक्कड़नामा - एक] क्या किया? क्या ना किया?, किस भीड़ से कथनी निकाली क्यों थमे? कब चल पड़े? बहते बसर, सैलाब से अटकल मिलाली कुछ इस तरह बस्तों ने शब्दों से वफ़ा ली इतने इलाके घूम-चक्कर बैठ घर दम फूलता प्रति...
[पूरी पोस्ट]
जोशिम
7
0
0
0
0
[22 Feb 2008 16:57 PM]



Shuffle








