समझौता [ पसिंजर ?]
देखें - कौन पुल सा थरथराता है ?] क्रांतिपथ के थे पथिक, जो श्रृंखलाओं में जड़े हैं अब कहाँ जाएँ सनम, मजबूरियों के स्वर चढ़े हैं युगों जैसे साल बीते, भंवर से जंजाल जीते, अव्वलों की प्रीत बोते, परीक्षा के पात्र रीते, भर गए जब सब्र प्याले, बुत मशीनों में ग...
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जोशिम
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[26 Feb 2008 17:12 PM]



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