हाशिये पर अल्प विराम

हरी मिर्च लगता नही कभी बनाएगी, कविता मुझे तो, बेफ़िकर, बेखौफ़, सीधा, सच्चा और होशियार । कुछ नहीं करती सिर्फ़ कविता, न लाड़, न प्यार, न ईर्ष्या, भेद न दुत्कार जैसे कुछ नहीं कर पाते, अकेले के अरण्य में दहाड़ते मतिभ्रम, डर के प्रतिहार, डाकिये के बस्ते में, खुंसे बै... [पूरी पोस्ट]
writer जोशिम
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[03 Mar 2008 23:42 PM]

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