नहीं लिखने के बहाने - ५

हरी मिर्च सिर्फ़ कोशिश है बस, हर कोशिश में लटक जाती है एक टक देखने जाता हूँ, मेरी आँख झपक जाती है और निगाहें भी ग़लत से, किसी दम मिल जो गईं आईने बन के तो आते है, मुई शक्ल चटख जाती है फिर अगर चेहरे ही दिखे, उन सब मुखौटों से अलग पहले पानी में बहे जाते हैं, और ला... [पूरी पोस्ट]
writer जोशिम
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[22 Mar 2008 12:50 PM]

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