हलफ़नामे पर विवाद होना ही है
इस बात पर भौहें तनी, पलकें उठीं, और पुतलियों के नृत्य हैं। कह्कशाँओं में अधिकतर, लोभ के ही भृत्य हैं। अतिशय अभी अति-क्षय नहीं, अनुराग है रंग-राग से, हाँ चाहतों से भय हटा, है प्रीति प्रस्तुत भाग से। स्वागत शरण दे सर्वदा, संतुष्टि रहती अलहदा, परमार्थ क...
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जोशिम
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[28 Mar 2008 16:54 PM]



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