साधारण का साधारण गीत
फुटकर-चिल्लर के बाजीगर, गाजा-बाजा गाते आना। योजन भर के अरमानों में, संक्षिप्त रूप से बह जाना। ज्यों द्वेष नहीं कर पाते हो, उपदेश सहज कर लाते हो। चित तेज धार पर जाते हो, पट मंथर- मंथर आते हो । ऐसे करतब दिखलाने में, नट, खट से झट कर जाने में, सब सही नही...
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[18 Apr 2008 09:24 AM]



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