जीवनसाथी

हरी मिर्च तुमको बस देखूं, तुम्हारी आँख में तारे पढूं मुश्किलों के दिन, दियों की जोत के बारे पढूं बन में परेशां परकटे, बादल उतर आएं जहाँ बिजलियों के बीच बहकर, धीर के धारे पढूं धूल उड़ बिछ जाएगी, थोड़ा सफ़र है गर्द का ग़म समय में याद करके, याद के प्यारे पढूं राहत... [पूरी पोस्ट]
writer जोशिम
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[24 Jul 2008 18:14 PM]

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