देवेन्द्र कुमार बंगाली का गीत

भोर सृजन संवाद एक पेड़ चांदनी एक पेड़ चांदनी लगाया है आंगने फूले तो आ जाना एक फूल मांगने ढिबरी की लौ जैसे लीक चली आ रही बादल रोता है बिजली शरमा रही मेरा घर छाया है तेरे सुहागने तन कातिक मन अगहन बार-बार हो रहा मुझमें तेरा कुआर जैसे कुछ बो रहा रहने दो यह हिसाब कर लेन... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मिश्र
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[15 Jun 2008 11:19 AM]

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