मानव सभ्यता का विकास

भोर सृजन संवाद मनुष्य ने युगों-युगों तक अपार यातनाएँ सहकर आज की सभ्यता को जन्म दिया है। यातना अधिकांश जनता के भाग्य में पड़ी, उस यातना से सुख उठाना थोड़े-से सम्पत्तिशाली लोगों के हाथ में रहा। यह युग मानव-समाज के विकास में एक विराट परिवर्तन का युग है। शोषण और ध्वंस... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मिश्र
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[08 Jul 2008 03:02 AM]

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