हिजाबों से दूर रहने वाला शायर – अहमदफ़राज़

भोर सृजन संवाद तू खुदा है न मेंरा ईश्क फरिश्तों जैसा दोनो इन्साँ हैं तो क्यों इतने हिजाबों में मिलें इन्सान को इन्सान से इन्सान के सलीके से मिलाने की बात करता ये शेर दुनिया के सबसे मशहूर और मकबूल शायरों में से एक अहमद फ़राज़ का है। १९४७ में भारत को आज़ादी तो मिल गई... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मिश्र
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[26 Jul 2008 15:06 PM]

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