तुम्हे प्यार करते हुए

भोर सृजन संवाद तुम्हे प्यार करते हुए तुम्हारे आकाश में जिद्दी परिंदे की तरह उड़ रहा हूँ जानता हूँ लौट आना है इस दुनिया में जिसे मैं चाहता हूँ तुम्हे प्यार करते हुए यहाँ करोड़ों चीजों के कसमसाने की आवाज उनके टूटने बिखरने का सिलसिला बनाता है जगह हमारे बीच अलग नहीं है... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मिश्र
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[27 Jul 2008 13:32 PM]

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