ईश्वरी सत्ता पर शोध पत्र
मोहल्ला पर टहल रहा था तो भाई निरंजन श्रोत्रिय और आकांक्षा से मुलाकात हो गई दोनों ईश्वर की पहेली में उलझे पड़े थे। अचानक मुझे मेरी एक कविता याद आगयी सो यहाँ रखा रहा हुँ। कुछ बातें ईश्वर के नाम पर ही। प्रदीप कांत ने एक फोटो खींचा था, उसे भी चिपका रहा ह...
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प्रदीप मिश्र
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[01 Oct 2008 04:03 AM]



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