तुम होते तो …
तुम होते तो इतना कुरूप अंतर का यह शृंगार न होता नयनों में यह बद्ध नीर , उर का पीड़ित संसार न होता । मानस -पटल घने कोहरे में जब भी दुःखाकुल होता; शोक - मलिन उर के पट पर नयनों की उजियाली मलता । विपदा के वीरानों में जब भी आहट तेरी दिखती; निज - प्राणों के...
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Alok Shankar
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[09 Feb 2009 12:34 PM]



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