थी बड़ी ही देर चुप्पी

नवागंतुक लोग कहते हैं, कि हमने चाहतों में मात खाई इस कदर लहरों ने अपने प्यार की कश्ती डुबाई बस जरा सी बात थी ,अपनी समझ में जो न आई मैं जिसे समझा सफ़र है, तुम उसे समझे लड़ाई ——— 2———- पीर मेरी रागिनी है, दर्द मेरा साज़ है खो गये अल्फ़ाज़ मेरे ,गुम बड़ी आवाज़ है अब न... [पूरी पोस्ट]
writer Alok Shankar
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[09 Feb 2009 12:32 PM]

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