सब मुमकिन है

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू भूल जाओ मेरी शक्ल, मुमकिन है । मेरी बातें भूल जाना मुमकिन है कुछ कदम का साथ भुलाना मुमकिन है अच्छे वक़्त में याद ना करना मुमकिन है। देखा जो हमने क्या क्या मुमकिन है छोड़ दिया कहना - ये नामुमकिन है।... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan
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[30 Sep 2008 02:10 AM]

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