में सिर्फ़ कुछ , तू सब कुछ ....

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू तेरे साथ का सावन एक नहीं अंखियों से सावन गिरे हज़ार कुछ है जो मुझको पता नहीं , जो पता है वो करे दिल को तार तू याद करे क्या छोड़ा तूने, मुझे मत कर ऐसा जां तू ऐसा प्यार जब एक हुए हैं हम दोनों , क्यों छुपा रखा है तूने कुछ भी यार ? मैंने माना कि बिन आग उ... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan
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[03 May 2009 15:18 PM]

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