बादल भैया
इस इस कविता में एक गाँव की छोटी सी बच्ची जो बरसात नहीं होने से परेशां है। उसके मन में कई विचार आते हैं। बादल को अपना भाई मानकर वह उनसे कुछ कहती है ) कई दिनों से राह देखती, मेरी आँखें पथराती, ग्रीष्म की गर्म हवाओं से , भेजी थी मैंने तुमको पाती , तीक्ष...
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Navnit Nirav
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[29 Jul 2009 10:05 AM]



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