बादल भैया

Meri Kavitayein इस इस कविता में एक गाँव की छोटी सी बच्ची जो बरसात नहीं होने से परेशां है। उसके मन में कई विचार आते हैं। बादल को अपना भाई मानकर वह उनसे कुछ कहती है ) कई दिनों से राह देखती, मेरी आँखें पथराती, ग्रीष्म की गर्म हवाओं से , भेजी थी मैंने तुमको पाती , तीक्ष... [पूरी पोस्ट]
writer Navnit Nirav
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[29 Jul 2009 10:05 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix