दादाजी
चांदनी रात में, जब बरसात होती है, उस समय, वह स्याह रात भी, कुछ खास होती है, खिड़की में खड़े होकर, आकाश की ओर देखता हूँ, चंदा की रोशनी संग, झरती हुई बूंदों को, निर्मल चाँदनी में, चमकती हुई बूंदों को, लगता है आसमान में रहने वाले, अनगिनत तारे टूटकर, आज ध...
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Navnit Nirav
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[29 Aug 2009 23:04 PM]



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