यह कठपुतलियाँ
क्या होगा इस लोकतंत्र का । विधायिका अपने कर्तव्य भूल गई , कानून में कमियों को दूर कराने की बजाये उसका लाभ उठाया जाने लगा तो न्याय पालिका ने दखल दिया । लेकिन काट ढूँढ ली गई है , बाहुबलिओं ने अपनी जगह पत्नी या और नजदीकी रिश्तेदारों को चुनाव के मैदान मे...
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Uttama
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[01 May 2009 08:42 AM]



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