आवाज दो हम एक हैं
मुंबई में हिंदू मरे, मुसलमान मरे, यहूदी मरे, गरीब मरे, अमीर मरे, आम आदमी मरे, खास आदमी मरे, बच्चे मरे, बड़े मरे, औरतें मरीं, सुरक्षा कर्मी मरे. गोली ने यह नहीं पूछा कि तुम किस धर्म के हो, समाज के किस वर्ग के हो, बस लगी और जिंदगी ख़त्म. जब जिन्दा थे त...
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Suresh Chnadra Gupta
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[04 Dec 2008 00:19 AM]



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