धन के संग्रह नहीं त्याग में सुख है

Sab ka maalik ek hai दो मित्र बहुत समय बाद मिले. एक मित्र सफल व्यवसाई बन गए थे. खूब धन संग्रह किया. दूसरे मित्र ने जन सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया था. धन के प्रति उदासीनता ही उनका धन थी. नदी पार जंगल में घूमने गए. बहुत बातें करनी थी. अपनी सुनानी थी. दूसरे की सु... [पूरी पोस्ट]
writer Suresh Chnadra Gupta
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[25 Aug 2009 00:29 AM]

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