बिछलन भरी जमीन पर आलोचना का संतुलन

वाङ्मय बिछलन भरी जमीन पर आलोचना का संतुलन रघुवंशमणि कुछ दिनों पहले हिन्दी साहित्य में ज्ञानोदय पत्रिका में प्रकाशित विजय कुमार के लेख पर लम्बा विवाद छिड़ा। इस विवाद में हिन्दी आलोचना के कई काले पक्ष नज़र आये। विवादों में न केवल अतिरेकपूर्ण बातें सामने आयीं बल... [पूरी पोस्ट]
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[28 Sep 2007 16:59 PM]

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