ईश्वर, सत्ता और कविता (1)

वाङ्मय ईश्वर, सत्ता और कविता (1) आपातकाल के पश्चात्, प्र्रकाशित हुए अपने कविता संग्रह 'हजार हजार बाहों वाली' में जनकवि नागार्जुन की एक कविता थी 'कल्पना के पुत्र हे भगवान'। अपने शीर्ङ्ढक को सार्थक करती हुई यह कविता ईश्वर के अस्तित्व पर लिखी गयी उस कालखंड की... [पूरी पोस्ट]
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[07 Oct 2008 12:12 PM]

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