ईश्वर, सत्ता और कविता 2

वाङ्मय ईश्वर, सत्ता और कविता 2 ईश्वर और धर्म को लेकर प्रचलित मानववादी दृष्टि का हिन्दी कविता में अभाव नहीं। गांधीवाद के दौर मेें इस व्यापक दृष्टि की राजनीति भी बड़ी व्यापक थी जिसका सैध्दान्तिक प्रतिफलन 'सर्वधर्म समभाव' में देखा गया। धर्म निरपेक्षता का यह व्य... [पूरी पोस्ट]
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[08 Oct 2008 00:32 AM]

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