फिर मचाया तहलका तहलका ने
तीखी पत्रकारिता समाज को दिशा देती है. कई लोग कहते हैं कि यह कोरी बात है. लेकिन अपनी कलम या कह लें कैमरे (आज के दौर में) से इस कोरेपन को मिटाया जा सकता है. आपरेशन कलंक इसी की एक कड़ी है. गुजरात के दंगे नरसंहार के रूप में याद किए जाते है. देश के कई राज...
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रमेंद्र
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[26 Oct 2007 13:53 PM]



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