माया महा ठगिनी हम जानी
यह हेडिंग आज अच्छी लगी. जनसत्ता में पढ़ी. ऐसा नहीं था कि पहली बार ही पढ़ी थी लेकिन आज के ब्लाग पर लेखन के लिए अच्छी थी. दरअसल बहुत दिनों के बाद एक ब्लाग पढ़ा. याद आ गया कि मैं भी कभी ब्लाग पर लिख लिया करता था. बस बैठ गया. यह भी पता था कि इसे पढ़ेंगे...
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रमेंद्र
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[30 Jan 2008 15:30 PM]



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