पाश की दो कविताएं
संसद जहरीली शहद की मक्खी की ओर उंगली न करें जिसे आप छत्ता समझते हैं वहां जनता के प्रतिनिधि बसते हैं। ----------------------- उम्र आदमी का भी कोई जीना है अपनी उम्र कव्वे या सांप को बख्शीश में दे दो।...
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रमेंद्र
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[06 Mar 2009 15:55 PM]



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