मेरी दिवाली
तुम्हारे संग मनाई हर वो दिवाली कुछ याद सी आ रही है उस रात के अमावसी अधेरें से दूर, सिर्फ मैं और तुम दीपों के बने गोल धारे में बैठे इंतज़ार करते रहे कि काश ये अमावस, प्रकाशवर्ष से भी लम्बी हो जाये हाँ सच, उस रात अहसास हुआ था मुझे, सीता मैय्या कि अतह: प...
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संगीता मनराल
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[25 Oct 2006 03:14 AM]



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