रज्जन की शादी - ०१
मंगल गीतों से सारा घर गूँज रहा था, रज्जन की मौसी ढोलक कि थाप को अपने गीतों में रमाने कि कोशिश करते हुये, बीच बीच में बैठी हुई औरतों को भी उकसा रही थी अरी गाओ ना साथ में, गप्पें मार रहीं हो हाँ, तालियों की भी थाप दो "अम्मा तेरा बिटवा बना है आज बन्ना"...
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संगीता मनराल
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[06 May 2008 03:43 AM]



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