कुछ हायकू
धर्म धर्म है बनाता इंसा इसे अधर्म क्यों ---------- जिहाद क्या खुदा की इबादद आंतकवाद ---------- रमज़ान के रोज़े की सहरी से जागी सुबह ---------- कूङा बीनता गरीब बचपन सङकों पर ---------- महानगर दौङ रहा आदमी पैसों खातिर ---------- बच्चे रोते चिङिया लाती दा...
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संगीता मनराल
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[18 Sep 2008 00:21 AM]



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