"तुम यहीं तो हो"
शाम के धुंधलके में ओस की कुछ बूदें पत्तों पर मोती सी चहक कर कह रही हैं तुम यहीं तो हो यहीं कहीं शायद मेरे आसपास नहीं शायद मेरे करीब ओह$ नहीं सिर्फ यादों में दूर कहीं किसी कोने में छुपे जुगनू से जल बुझ, जल बुझ भटका देते हो मेरे ख्यालों को और भवरें सा...
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संगीता मनराल
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[17 Oct 2008 01:06 AM]



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