जीवन एक रेखागणित

इनर वायॅस दो जीवन समान्तर चलकर भी कभी बिछुङ जाते हैं एक नारियल बेचने वाला अपनी वृत की गोल परिधी में घूमकर भी कभी खो जाता है और वो प्रेमी अपनी पत्नी और प्रेमिका के प्रेम मे पङकर एक त्रिभुज के तीन कोनों में असंतोष और भय से बचता हुआ भटक - भटक कर थक जाता है रिश्ते... [पूरी पोस्ट]
writer संगीता मनराल
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[21 Oct 2008 01:25 AM]

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