"अमन चाहिये, सुकून चहिए, जिन्दगी चाहिये"
सोचा भाग चलूँ, दिल्ली छोङ मुम्बई, फिर मुम्बई से बैंगलौर, आसाम, जयपुर, गुजरात और कहाँ - कहाँ भागूँ... थक गई हूँ जिन्दगी को बचाते। सभी तो थक गये हैं, डरे हुये हैं, आतंकित है, अपनों के लिये, अपनों के अपनों के लिये और फिर भविष्य के लिए भी तो। हमेशा से तो...
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संगीता मनराल
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[03 Dec 2008 06:49 AM]



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