वो मेरे बच्चों को
वो मेरे बच्चों को स्कूल ले के जाता था।और उसका बेटा वहीं खोमचा लगाता था॥उन्हें जो धूप से, बरसात से बचाता था ।खुद उसके सर पे फ़क़त आसमाँ का छाता था।भटक गया हूं जहां मैं –कभी उसी वन से,सुना तो है कि कोई रास्ता भी जाता था॥सियाह रात थी, और आँधियाँ भी थीं; ल...
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Dr. Amar Jyoti
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[28 Nov 2008 03:14 AM]



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