जब भी चाहा

कुछ ग़ज़ल कुछ गीत ! जब भी चाहा तुमसे थोड़ी प्यार की बातें करूं पास बैठूं दो घड़ी,श्रृंगार की बातें करूं।वेदना चिरसंगिनी हठपूर्वक कहने लगी आंसुओं की,आंसुओं की धार की बातें करूं।देखता हूँ रुख ज़माने का तो ये कहता है मन भूल कर आदर्श को व्यवहार की बातें करूं।आप कहते हैं प्रगत... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Amar Jyoti
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[12 Dec 2008 02:04 AM]

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