जागो युवा , जागो अन्दर का शिवा

जब-जब देश में गलत का फैलाव हुआ , हमारा अपनी जमीर से अलगाव हुआ । बेचा खुद के अहसासों को चाँदीकी टुकडो के खातिर , गरीबो के पैसों से शेयरबेचते बाजार के शातिर । हल्का से एक झटका लगा बड़ा पेड़ कट कर गिरा , हमारी अर्थ जगत की चूल हिल गई guru guru की गुरुतई... [पूरी पोस्ट]
writer janokti
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[10 Apr 2009 00:24 AM]

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