चीर देंगे वक्त के जिस्म पर लगा हर एक घाव
जय हिंद , साथिओं ! अभी -अभी हमारे गणतंत्र या लोकतंत्र अथवा प्रजातंत्र जो भी कहें , क्योंकि वो बस कहने भर को हमारा है बाद बाकि इसकी आत्मा अर्थात संविधान तो आयातित ही है ना , का कुम्भ समाप्त हुआ है । वैसे तो यह कुम्भ मेला कम अखाडा ज्यादा लगता है पर अखा...
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Editorial team, JANOKTI
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[27 May 2009 08:40 AM]



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