चाँद - चकोर
किसी गुलसितां में चहकती थी हरदम , दो आंखों में उसकी महकती थी शबनम , सभी फूल पाती उसी पर फ़िदा थे , जो गूंजे सदा में उसी की सदा थे | थी लाडो सभी की चहेती चकोर , कूदती भागती थी वो चारों ही ओर , था मासूम दिल ऐसा , भोली सी सूरत , थी उसके लिए ये जहाँ खूबसू...
[पूरी पोस्ट]
kavitaprayas
11
0
0
0
0
[05 Sep 2008 20:20 PM]



Shuffle








