दिवाली
उजली शाम , रौनक हैं रातें , अब दिवाली मनाएंगे हम , पल दो पल हंस लें खुशी से , सारे सपने सजायेंगे हम , जो तुम सोचो कैसे धूम मचाओगे , कपड़े , जेवर , कितने पटाखे लाओगे , यादों में रखना तुम उन बेचारों को , किस्मत से टूटे , तूफां के मारों को , जिनके लिए ,...
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kavitaprayas
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[28 Oct 2008 02:05 AM]



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