वसंत और फगुआ

मेरी डायरी वसंत अपने शवाब पर है और हवाओं में फगुनाहट की मादक महक सरसरा रही है. इसी अनुभव को आत्मसात करने के लिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने गाँव चला गया था. यूँ तो गाँव जाने का मकसद कुछ और ही था पर फागुन के इस महीने में जो छटा चारों ओर फैली रहती है उसे देखने का ल... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अजीत कुमार
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[29 Feb 2008 11:53 AM]

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