दारोगाजी की मूंछ - 1

तत्काल मुंशी नौरंगीलाल को शुरू से ही जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौक था. चन्द्रकान्ता, भूतनाथ, मायामहल, पढ़ते-पढ़ते उन्हें जासूस बनने की सनक सवार हो गयी थी. और संयोग भी ऐसा हुआ की बीए का तिलिस्म तोड़ने के बाद उन्हें काम भी वैसा ही मिल गया. नौरंगीलाल दारोगा बन ग... [पूरी पोस्ट]
writer विजय ठाकुर
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[22 Oct 2008 23:25 PM]

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