दारोगा जी की मूंछ - ३

तत्काल दारोगाजी मूंछों पर ताव देते हुए वहाँ पहुँचे तो देखते हैं कि वहाँ कुहराम मचा हुआ है। चंचला देवी खिड़की की छड़ से अपना सर फोड़ने पर तुली हुई है। मुंशीजी को देखकर चंचला जोर-जोर से विलाप करने लगी - मेरे भाई से आपकी क्या दुश्मनी थी जो आपने उन्हें गोली मार दी... [पूरी पोस्ट]
writer विजय ठाकुर
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[25 Oct 2008 15:19 PM]

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