कल के साथ कल...कुछ पल
पापा की कितनी बाते बिलकुल दादा जैसी है वो जब मुझसे मिलते हैं पापा जैसे लगते हैं..... दादी के थके चेहरे से ऐसे स्नेह उमड़ता है मुझे देखकर उनकी आँखों में सपना सा कुछ उगता है मेरे नाना सब बदमाशी समझते हैं रंगे हाथ पकड़ कर मुझको बस मन ही मन हँसते हैं माम...
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Beji
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[11 Aug 2008 05:08 AM]



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