एक कविता : कितने पौरुष वीर .....
कितने पौरुष वीर पुरुष है ! हाथों में बंदूक लिए नारी को निर्वसना कर के हांक रहे है सीना ताने मरा नहीं दुर्योधन अब भी जिंदा है हर गाँव शहर में अगर मरा है 'धर्मराज'का सत्य मरा है 'अर्जुन ' का पुन्सत्व मरा है 'भीम' का भीमत्व मरा है दु:शासन तो अब भी जिंदा...
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आनन्द पाठक
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[22 May 2009 02:20 AM]



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