एक गीत :वह तो एक बहाना भर है ....

गीत  ग़ज़ल  औ गीतिका वह तो एक बहाना भर है, वरना मेरा जीना क्या है वरना मेरा मरना क्या है पोर-पोर आँसू में डूबे गीत-गीत के अक्षर-अक्षर सजल-सजल हो उठे नयन है बह जाएंगे निर्झर-निर्झर वह तो सिर्फ़ सुनाना भर है ,वरना मेरा रोना क्या है वरना मेरा हँसना क्या है प्रीति-प्रीति अँजु... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[12 Jul 2009 02:58 AM]

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