निर्मल वर्मा को याद करते हुए
निर्मल स्मरण योगेंद्र कृष्णा तुम्हारे अंतस से नि:सृत तुम्हारी दुनिया लौट जाती है हर बार तुम्हारे ही भीतर हमें पता है तुमने ही नहीं तुम्हारे किरदारों ने भी तुम्हें रचा है और अपने किरदारों की ही दुनिया में अंतत: रचने-बसने के लिए चुन लिया तुमने किराए का...
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योगेंद्र कृष्णा Yogendra Krishna
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[07 Oct 2008 13:29 PM]



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